भारत में नोटबंदी के बाद से डिजिटल पेमेंट में बड़ी तेजी आई है। 5, 10 या 50 रुपये तक की पेमेंट भी लोग अब धड़ल्ले से यूपीआई के माध्यम से कर रहे हैं और महज एक QR कोड स्कैन करते ही पेमेंट हो जाती है। QR कोड का बहुतायत में इस्तेमाल भले ही बीते कुछ सालों से बढ़ा है, लेकिन इसका आविष्कार काफी पहले हो गया था। इसका फुल फॉर्म भी कम लोगों की मालूम होगा, जो है- Quick Response code। दुनिया का पहला QR कोड 1994 में जापान में बना था। यही नहीं इसके आविष्कार की कहानी भी दिलचस्प है। इसे पहली बार किसी फिनटेक कंपनी या किसी बैंकिंग कंपनी ने तैयार नहीं किया था बल्कि एक कार कंपनी का यह आविष्कार था।
दुनिया की नामी कार कंपनी Toyota की सहायक कंपनी Denso Wave ने इसे तैयार किया था। इसे तैयार करने वाले थे जापान के ही मासाहिरो हारा। यह क्यूआर कोड इसलिए तैयार किया गया था कि कार के पार्ट्स को ट्रैक किया जा सके। इससे पहले 1D बारकोड हुआ करते थे, जिन्हें स्कैन करना आसान नहीं था और उनमें जानकारी भी सीमित ही रहती थी। लेकिन हारा ने उस समय एक क्रांति की नींव रख दी, जब सफेद और काली पट्टियों के पैटर्न वाला क्यूआर कोड तैयार कर दिया। इसकी खासियत यह थी कि इसे किसी भी दिशा से स्कैन किया जा सकता था।
तब विकसित हुए क्यूआर कोड की तकनीक का ही विकास हम देख रहे हैं कि जगह-जगह बारकोड लगे हुए हैं और लोग अपनी जरूरत की तमाम चीजों के लिए फट से स्कैन कर लेते हैं। सालों तक इन क्यूआर कोड्स का इस्तेमाल कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स की जानकारी देने और क्लासिफिकेशन के लिए करती थीं। फिर जब ऑनलाइन पेमेंट का दौर आया तो हर रिसीवर की पहचान के लिए उसका एक यूनिक क्यूआर कोड तैयार कर दिया गया। अब यही कोड क्रांति बन गया है। यूपीआई पेमेंट्स का यह मुख्य बिंदु है।
पहला क्यूआर कोड तैयार होने के बाद करीब 6 सालों तक इसका इस्तेमाल जापान में ही होता रहा। शुरुआत में इसे टोयोटा कंपनी ही प्रयोग करती थी। इसका विस्तार होना तब शुरू हुआ, जब वर्ष 2000 में इसे ISO प्रमाणन मिला। अब यह स्थिति है कि दुनिया के हर कोने में QR कोड इस्तेमाल किए जाते हैं। किसी चीज की जानकारी देने, किसी का प्रोफाइल उसमें डालने या किसी इवेंट समेत तमाम चीजों का पूरा ब्योरा देने तक के लिए इनका इस्तेमाल किया जा रहा है। यही नहीं अब क्यूआर कोड जनरेट करना भी बेहद इस्तेमाल हो गया और इंटरनेट पर ही तमाम ऐसी वेबसाइट्स हैं, जहां एक लिंक शेयर करके क्यूआर कोड तैयार किया जा सकता है।
