पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के बीच, चुनाव आयोग (ECI) ने बुधवार को पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाई और लंबित अनुशासनात्मक मामलों की स्थिति के बारे में लिखा.
पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को लिखे पत्र में निर्वाचन आयोग सचिव एसके मिश्रा ने लिखा कि, उन्हें 14 जनवरी को उनके पत्र को देखने का निर्देश दिया गया, जो मुख्य निर्वाचन अधिकारी पश्चिम बंगाल को भेजा गया था, जिसमें इस मामले में एडवोकेट जनरल की राय भेजी गई थी.
निर्वाचन आयोग सचिव मिश्रा ने आग्रह करते हुए चीफ सेक्रेटरी से कहा कि, वह कमीशन का 5 अगस्त, 2025 का सम संख्या वाला पत्र देखें. जिसमें संबंधित ERO/AERO को सस्पेंड करने और उनके खिलाफ सही अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और गलती करने वाले अधिकारियों के खिलाफ (जिसमें कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले डेटा एंट्री ऑपरेटर भी शामिल हैं) RP एक्ट, 1950 के सेक्शन 32 के तहत, भारतीय न्याय संहिता, 2023 और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के संबंधित प्रावधान के साथ FIR दर्ज करने के निर्देश दिए गए थे.
इसके बाद 29 दिसंबर के एक पत्र के जरिए बताया गया कि बरुईपुर पुरबा असेंबली इलाके के एक अधिकारी, तथागत मंडल, AERO को बरी कर दिया गया है और सुदीप्ता दास, AERO-मोयना असेंबली इलाके पर मामूली पेनल्टी लगाई गई है. पत्र में लिखा है, “इस बारे में, उनका ध्यान कमीशन के 31 मई, 2023 के निर्देशों के पैरा 4.5 की ओर दिलाया जाता है, जिसमें कहा गया है कि डिसिप्लिनरी अधिकारियों को कमीशन की सिफारिश पर शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई से पैदा होने वाले किसी भी मामले को बंद करने या फाइनल करने से पहले चुनाव आयोग से सलाह जरूर लेनी चाहिए.
यह साफ है कि संबंधित अधिकारी ने ऊपर बताए गए निर्देशों का उल्लंघन करते हुए, मामले में आखिरी फैसला लेने से पहले कमीशन से सलाह नहीं ली. चूंकि अनुशासनात्मक कार्यवाही निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना और आयोग के साथ अनिवार्य परामर्श के बिना अंतिम रूप दी गई है.
इसलिए आयोग अनुशासनात्मक कार्रवाई के ऐसे अंतिम रूप को स्वीकार नहीं करता है. जिसके अनुसार, इसे आयोग की नजर में प्रक्रियात्मक रूप से अनियमित और गैर-कानूनी माना जाएगा, जो आयोग के निर्देशों के अनुसार सख्ती से पुनर्विचार का कारण बनता है. निर्वाचन आयोग के मुख्य सचिव ने कहा कि, उपरोक्त प्रक्रियात्मक चूक के लिए जिम्मेदार सक्षम प्राधिकारी और अधिकारी से लिखित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, जिसमें स्पष्ट रूप से उन परिस्थितियों को समझाया जाएगा जिनके कारण आयोग के निर्देशों का पालन नहीं किया गया.
इसमें कहा गया है कि, आयोग के 8 जनवरी, 2026 के सम संख्या वाले पत्र के क्रम में उनसे (पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव) अनुरोध है कि वे सभी चार अधिकारियों, यानी तथागत मंडल, देबोत्तम दत्ता चौधरी, बिप्लब सरकार और सुदीप्त दास के संबंध में अनुशासनात्मक कार्रवाई का आधार बनने वाले आरोपों के लेख, बचाव के लिखित बयान, जांच रिपोर्ट, जांच अधिकारी के निष्कर्ष, अनुशासनात्मक अधिकारी के आदेश, फाइल नोटिंग और अन्य सभी संबंधित रिकॉर्ड सहित पूरे अनुशासनात्मक मामले के रिकॉर्ड प्रस्तुत करें. इसमें कहा गया है कि आयोग को 24 जनवरी को शाम 5 बजे तक विचार के लिए उपरोक्त जानकारी देनी होगी.
