योग गुरु बाबा रामदेव गुरुवार को संगम नगरी प्रयागराज पहुंचे. उन्होंने सबसे पहले संगम में डुबकी लगाई और उसके बाद सतुआ बाबा के आश्रम पहुंचे. इसके बाद उन्होंने पुरी शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती से भी मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया.
माघ मेला प्रयागराज में संगम स्नान के बाद बाबा रामदेव ने कहा कि व्यक्तिगत अहंकार की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. एक सवाल पर उन्होंने कहा कि अपने योगियों, अपने महात्माओं को ऐसे अभद्र भाषा का प्रयोग करना यह किसी शंकराचार्य को तो बहुत दूर की बात है किसी साधू को भी शोभा नहीं देता. ऐसी अभद्र टिप्पणी करना मैं बहुत ही निंदनीय व शर्मनाक मानता हूं. हर एक आदमी को अपनी मर्यादा, अपनी गौरवगरिमा को ध्यान रखना चाहिये.
उन्होंने कहा कि तीर्थ में भी कुछ लोग अलग-अलग प्रकार से अपना एजेंडा लेकर के चलते हैं. कम से कम तीर्थ में किसी व्यक्तिगत अहंकार और प्रतिष्ठा की कोई जगह नहीं होनी चाहिए. यहां सब तीर्थराज में हैं. मां गंगा, यमुना और सरस्वती की शरणागति में हैं. यहां पर किसी प्रकार के वैयक्तिक अहंकार की जगह नहीं होनी चाहिए.
बाबा राम देव ने कहा कि हम तो हाथ जोड़कर एक ही प्रार्थना करना चाहते हैं कि जिसका अभिमान नहीं गया, वह साधु कहां है. अभिमान का त्याग करना साधु की पहली सीढ़ी है. उन्होंने कहा कि माघ मेले में स्नान का दान का ध्यान का विशेष महत्व है. त्रिवेणी संगम में आना ही अपने आपमें एक सौभाग्य की बात है. यहां जो दिव्यानुभूति होती है वह अद्भुत है. अपने अध्यात्म धर्म, योग धर्म और राजधर्म का जिस तरह से योगी जी महाराज निर्वहन कर रहे हैं, वह आत्मा को हर्षित करने वाला है.
उन्होंने कहा कि आज यह सनातन का गौरवकाल है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जो सनातन को गौरव मिल रहा है, वह अद्भुत है. माघ मेले में लाखों सनातनी मां भगवती की आराधना करते हैं. इससे पूर्व बाबा रामदेव पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती के शिविर में गए और उनका अशीर्वाद प्राप्त किया.
